क्या है चिपको आंदोलन के पीछे की कहानी.

1974 में वन विभाग ने जोशीमठ के रैणी गाँव के क़रीब 680 हेक्टेयर जंगल ऋषिकेश के एक ठेकेदार को नीलाम कर दिया। इसके अंतर्गत जनवरी 1974 में रैंणी गांव के 2459 पेड़ों को चिन्हीत किया गया । 23 मार्च को रैंणी गांव में पेड़ों का कटान किये जाने के विरोध में गोपेश्वर में एक रैली…

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जाने हमारा उत्तराखंड…

उत्तराखंड का जीवन पहाड़ के जैसा ही कठिन रहा है. पहाड़ में संशाधनों के अभाव में जीवन जीने की जद्दोजहद में लोगों ने कभी हार नहीं मानी और तमाम मुश्किलों के बाद भी लोग मंजिल की ओर अग्रसर रहे. पहाड़ों का रहन-सहन, पहाड़ों के माकन, पहाड़ों की दुकान, पहाड़ों की प्राथमिक शिक्षा, पहाड़ों का जन-जीवन…

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