क्या है चिपको आंदोलन के पीछे की कहानी.

1974 में वन विभाग ने जोशीमठ के रैणी गाँव के क़रीब 680 हेक्टेयर जंगल ऋषिकेश के एक ठेकेदार को नीलाम कर दिया। इसके अंतर्गत जनवरी 1974 में रैंणी गांव के 2459 पेड़ों को चिन्हीत किया गया । 23 मार्च को रैंणी गांव में पेड़ों का कटान किये जाने के विरोध में गोपेश्वर में एक रैली…

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गढ़वाल राइफल्स का “जनरल बकरा”

गढ़वाल राइफल्स का “जनरल बकरा” बात हिन्दुस्तान आजाद होने से पहले की है। लैन्सडाउन में उस समय गढ़वाल राइफल का ट्रेनिंग सेन्टर हुआ करता था। उस समय फ्रांस, जर्मन, बर्मा, अफगानिस्तान आदि देशों से अंग्रेजी शासन का युद्ध होता रहता था अत: गढ़वाल राइफल की पल्टन को भी हुकूमत के शासन के अनुसार उन स्थानों…

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कविल्ठा, कालीदास की जन्मभूमि

मित्रो ! आप यह जानकर गौरवान्वित महसूस करेगे कि भारत वर्ष के महानतम कवि कालीदास का जन्म उत्तराखंड में हुआ था. तब गढ़वाल केदारखंड और कुमाऊ मानसखंड से नामित था. इनका जन्म ३३५ इसवी में मन्दाकिनी क्षेत्र में गुप्तकाशी के कालीमठ के आसपास स्थित “कविल्ठा” ग्राम में हुआ था. इनके बाल्यकाल का नाम बांदरु था…

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उत्तराखंड के गांधी को नमन

९ नवंबर को उत्तराखंड राज्य निर्माण के १४ वर्ष पूरे हो गए. सबसे पहले uttarakhand के शहीदों को शत-शत नमन. जब हम बात उत्तराखंड की करें तो अलग राज्य के सपने को हकीकत में बदलने का श्रेय जाता है स्व. इन्द्रमणि बडोनी जी को. बडोनी जी का जन्म उत्तराखंड के टिहरी जनपद के जखोली ब्लाक…

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सतत संघर्ष से बना उत्तराखंड

Uttarakhand राज्य निर्माण के १४ वर्ष पूरे हो रहे हैं. आएं जाने कैसा बना हमारा अलग राज्य. Uttarakhand संघर्ष से राज्य के गठन तक की कुछ महत्वपूर्ण तिथि-घटनाएं- * भारतीय स्वतंत्रता आन्देालन की एक इकाई के रूप में उत्तराखंड में स्वाधीनता संग्राम के दौरान १९१३ के कांग्रेस अधिवेशन में उत्तराखण्ड के अधिकांश प्रतिनिधि सम्मिलित हुए. इसी…

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आज चांदपुर गढ़ी में राजवंशी करेंगे नंदा की पूजा

टिहरी के राजा के प्रतिनिधि के तौर पर राजा कीर्ति प्रताप सिंह और ठाकुर भवानी सिंह चांदपुर गढ़ी में अपनी अराध्य देवी मां श्रीनंदा की पूजा करेंगे. राजजात समिति के राजा किन्हीं कारणों से नहीं आ रहे हैं. लेकिन उनके प्रतिनिधि के तौर पर टिहरी दरबार से उनके परिवार के दो सदस्य पहुंचगे. विदित हो…

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पहाड़ों में बकरी पालन

पहाड़ों में बकरी पालन आजीविका के लिए सबसे फायदेमंद होता है. पाहड में लोग बकरियों का पालन वर्षों पूर्व से करते आ रहे हैं. इसका ऊन गर्म कपड़ों को बनाने आता था तो गोबर सबसे अच्छा खाद होता था. बकरी को नगद धन के रूप में माना जाता था. लेकिन बकरियों की खासियत ये होती…

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मायके के मोह में बंधी नंदा चलीं ससुराल नौटी से शुरू हुई श्रीनंदा राजजात

मौसम के बीच पूजा-अर्चना के साथ चमोली जिले के नौटी से सोमवार को श्रीनंदा राजजात का श्रीगणेश हो गया. मां नंदा को मायके से ससुराल यानी कैलास विदा करने की 14 साल बाद हो रही इस यात्रा के दौरान भक्तों में आस्था, उल्लास और भावुकता की त्रिवेणी प्रवाहमान दिखी. नंदा मंदिर परिसर में राजजात समिति…

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