उत्तराखंड प्रीमियर लीग…इसलिए

बेशक व्यक्तिगत रूप से हम मुंबई के प्रवासी उत्तराखंडी सफलता के शिखर पर हैं और निजी उपलब्धियों पर इतराने के लिए हमारे पास बहुत कुछ है, पर जब हमारी सामाजिक पहचान किसी की निगाहों में सवाल बन कर उभरती है, तो निजी उपलब्धियों का संसार टूट कर बिखरने लगता है. बहुगुणा, नौटियाल, जोशी, काला, राणा…

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क्या आप जुड़े अपनी उत्तराखंडी वेबसाइट से ?

उतराखंड के निवासी एवं प्रवासी समाज को एक सूत्र में जोड़ने व प्रवासियों के सामाजिक दायरे को विस्तार देने के लिए www.uttarakhandpravasi.com और मेट्रोमोनियल वेबसाइट www.byohbaraat.com नामक दो सामाजिक वेबसाइट तैयार हैं. उतराखंडप्रवासीडॉटकॉम अन्य शोसियल नेटवर्किंग साईट की तरह ही बिलकुल मुफ्त है. यह साईट उतराखंड के लोगों के लिए एक डिजिटल डायरेक्ट्री का भी…

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दिवाली को अपनों का इंतज़ार

दीपावली के त्योहार देश भर में खुशियों का त्योहार होता है. किन्तु उतराखंड में दिवाली का त्योहार और भी खास होता था. उत्तराखंड में दीपावली के मायने सिर्फ दीप पर्व मानना ही नहीं, अपनों के मिलन का त्योहार भी होता था. दिवाली एसा त्योहार होता था, जिसमे गांव छोड़ कर परदेश गए अपनों के घर…

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सत्य की विजय का पर्व दशहरा

अन्याय, अत्याचार, अहंकार, विघटन और आतंकवाद आदि संसार के कलंक हैं. इतिहास पुराण गवाह हैं कि जब-जब आसुरी शक्तियां सिर उठाती रही हैं. तब-तब इस धरती में महापुरुषों ने जन्म लिया और आसुरी शक्तियों का विनाश किया. त्रेता युग में रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद, खरदूषण, ताड़का, त्रिशरा आदि और द्वापर में कंस, पूतना, बकासुर के अलावा…

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आलू के बदले नमक

पहाड़ों में खेती का उत्पादन घरों की व्यवस्था चलाने तक सीमित था. कुछ फसलें जो नकद फसलें होती थी उनको दुकानदारों या ठेकेदारों को अन्य अन्न के बदले अदलाबदली की जाती थी. पहाड़ों में कई इलाकों में आलू और चोलाई (मारछा) बड़ी मात्रा में होता था. लोग आलू और चोलाई को उठाकर आलू के ठेकेदार…

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बुजुर्गों के बटुआ/थैले ही थे बैंक

उतराखंड के गांवों में पैसा कम था और पैसा संचय करने की बात बहुत दूर की होती थी. बैंक आदि की बात तो बहुत दूर की थी. तब बुजुर्ग वक्त-मौके के लिए धन जान से भी प्यारा मानकर अपने पास रखते थे. घरों में बुजुर्ग गारजन के बटुआ-बक्सा बैंक लॉकर की तरह थे. वे अपनी…

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अब उत्तराखंडियों की अपनी वेबसाइट भी

उतराखंड के निवासी एवं प्रवासी समाज को एक सूत्र में जोड़ने के लिए मुंबई से एक जोरदार पहल हुई है. गोविन्द सेमवाल समूह के प्रमुख श्री वासुदेव सेमवाल जी ने प्रवासियों के सामाजिक दायरे को विस्तार देने के लिए www. uttarakhandpravasi.com और मेट्रोमोनियल वेबसाइट www. byohbaraat.com  नामक दो सामाजिक वेबसाइट बनाई हैं. उतराखंडप्रवासीडॉटकॉम वेबसाइट अन्य…

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“मनिआर्डर” थी पहाड़ की अर्थव्यवस्था

उत्तराखंड में खेती कर खाने-पीने का अनाज तो लोग उत्पन्न कर लेते थे. किन्तु रूपए की रक्कम जुटाना बड़ा मुश्किल होता था. पहाड़ में थोड़ा बहुत ही नकद आय के साधन होते थे. पहाड़ के गांवों से अधिकांश लोग परदेश होते थे. जिनके मनिआर्डरों से पहाड़ की अर्थव्यवस्था चलती थी. या यूं कहियें की पहाड़…

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पहाड़ की शेरनी के नाम पुरस्कार

श्रीनगर गढ़वाल:हमलावर गुलदार को ढेरकर खुद की जान बचाने वाली रुद्रप्रयाग जिले की शेरनी यानि कमला देवी के नाम पर राज्य सरकार वीरता पुरस्कार शुरू करेगी. अदम्य साहस का परिचय देने वाली महिलाओं को नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर ये पुरस्कार दिए जाएंगे. रविवार को श्रीनगर बेस अस्पताल में इलाज करा रही घायल…

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