लाखामंडल : शिव का तीसरा धाम

लाखामंडल का शिव मंदिर, जौनसार बावर की एक ऐसी प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर, जो हमें सौभाग्य से मिली है बल्कि यह कहना गलत न होगा की अगर हमारे क्षेत्र के प्रतिनिधि स्वयं इसकी अनदेखी न करते तो शायद केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के बाद उत्तराखंड में यह तीसरा प्रमुख “शिव धाम” के नाम से प्रचलित होता,…

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मयाली कंकण में जन्मी माँ जगदी

नंदू की रौतेली जगदी की उत्पत्ति के संबंध में कहा जाता है कि देवकी की संतान के द्वारा कंस का वध निश्चित था. देवकी की आठवीं संतान द्वारा अपने विनाश की भविष्यवाणी से कंस ने अपनी गर्भवती बहन देवकी को काल कोठरी में डाल दिया. जैसे-जैसे देवकी के प्रसबकाल के दिन नजदीक आने लगे, कंस…

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मुश्किल के साथी थे पहाड़ के देवता

उत्तराखण्ड देवभूमि भूमि के नाम से जाना जाता है. यहां युग-युगों से ही देवताओं का वास रहा है. यहां हर गांव में तो मंदिर हैं ही, हर घर में देवता स्थापित हैं. घरों में महीने की हर संक्रांति को अपने आराध्य देवों को “रोट” काट कर भोग लगाया जाता है. देवताओं को चड़ाए जाने वाले…

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आज चांदपुर गढ़ी में राजवंशी करेंगे नंदा की पूजा

टिहरी के राजा के प्रतिनिधि के तौर पर राजा कीर्ति प्रताप सिंह और ठाकुर भवानी सिंह चांदपुर गढ़ी में अपनी अराध्य देवी मां श्रीनंदा की पूजा करेंगे. राजजात समिति के राजा किन्हीं कारणों से नहीं आ रहे हैं. लेकिन उनके प्रतिनिधि के तौर पर टिहरी दरबार से उनके परिवार के दो सदस्य पहुंचगे. विदित हो…

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मायके के मोह में बंधी नंदा चलीं ससुराल नौटी से शुरू हुई श्रीनंदा राजजात

मौसम के बीच पूजा-अर्चना के साथ चमोली जिले के नौटी से सोमवार को श्रीनंदा राजजात का श्रीगणेश हो गया. मां नंदा को मायके से ससुराल यानी कैलास विदा करने की 14 साल बाद हो रही इस यात्रा के दौरान भक्तों में आस्था, उल्लास और भावुकता की त्रिवेणी प्रवाहमान दिखी. नंदा मंदिर परिसर में राजजात समिति…

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