पहाड़ी जाड़े की सौगात: सना हुआ नींबू

सामग्री: बड़े पहाड़ी नींबू – २ पहाड़ी माल्टे – २ पहाड़ी मूली – १ दही – १/२ किलो हरे धनिये और हरी मिर्च से बना मसालेदार नमक भांग के भुने बीजों का चूरन कतला हुआ गुड़ – ५० ग्राम पहाड़ी नींबू करीब करीब बड़े दशहरी आम जितने बड़े होते हैं। माल्टे, मुसम्मी और संतरे के…

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पत्थर “खिलोने” और पालतू पशु होते थे “साथी”

खेल-कूद व्यक्ति के जीवन निर्माण और शारीरिक विकास के लिए अहम माने जाते थे. पहाड़ के व्यक्ति इसलिए भी शहर के बच्चों से ज्यादा सबल होते थे क्योंकि उनका बचपन कठोर परिश्रम और कठिन हालातों में गुजरा होता था. पहाड़ के बच्चों के खेल भी उनकी शारीरिक क्षमता के विकास के सबसे अहम होते थे…

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काम ही धर्म और काम ही पूजा था महिलाओं का धर्म

उत्तराखंड के जन-जीवन की अगर बात करें तो महिलाएं सबसे अग्रणी भूमिका में रही हैं. पहाड़ के घरों को आबाद करने में महिलाओं की भूमिका पुरुषों से कई ज्यादा रही है. घर के काम की सारी जिम्मेदारी पहाड़ की महिलाओं की होती थी. सुबह-शाम काम ही काम पहाड़ की नारी की पहचान होती थी. जीवन…

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धान काटने के दिन से शुरू होते थे “झुमेला”

उत्तराखंड की कला-संस्कृति केवल मनोरंजन का साधन भर नहीं थी. ये पाहड के सामाजिक-सांस्कृतिक बंधन के जरिये लोगों को एक सूत्र में पिरोने के महत्वपूर्ण साधन थे. यहां हर ख़ुशी के अवसरों पर उसकी विशेषता के गीत गाये जाते थे. गीत-संगीत में पहाड़ की ख़ुशी, पहाड़ की व्यथा, पहाड़ की पीड़ा  समाहित होती थी. पाहड…

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गुरुजनों को घर से पहुंचाते थे राशन

इन्शान के जीवन में माता-पिता और गुरु देवता की सबसे बड़ी भूमिका होती है. शिक्षक ही जन्म के बाद संसार में जीने के लिए जीवन का अन्धकार मिटाने शिक्षा की ज्योति से बच्चों के भविष्य उज्जवल बनाने की नींव रखते हैं. माता-पिता और गुरु देवता की उत्तराखंड में भी बड़ी परम्परा थी. गुरुजनों का बड़े…

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‘दरांती/दाथडी’ पहाड़ी महिलाओं की सच्ची साथी

किसी भी कार्य के लिए उस कार्य में लगने वाला उपकरण सही होना जरूरी होता है. पहाड़ की महिलाओँ की साथी है दरांती ‘दाथडी’. घास-लकड़ी, खेतों की सफाई-निराई में दरांती महिलाओं की सबसे करीबी साथी है. कमर के पागडे में लगी ये कामकाजी महिलाओं की शोभा बढाती हैं. महिलाएं भी अपनी दरांती की धार कुंद…

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बांधकर रखे जाते थे पहाड़ के बच्चे

गाँव के जिन घरों में बुजुर्ग होते थे, वहां तो देखभाल की समस्या नहीं रहती थी. लेकिन जिन घरों में महिलाएं अकेली होती थी वहां बच्चों की देखभाल की कोई व्यवस्था नहीं होती थी. कामकाज में लगी महिलाएं सुबह बच्चों को घर में एक जगह पर बांध कर अपने काम को चली जाती थी. काम…

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