मोनिका ने बचाई थी भाई की जान

उफनाती अलकनंदा में जिंदगी से जूझ रहे छोटे भाई की जान बचाने कूद पड़ी मोनिका की बहादुरी को अब पहचान मिल सकेगी. मोनिका ने भाई को तो बचा लिया था, लेकिन उसकी अपनी सांसें उखड़ गईं. उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद ने चमोली की इस किशोरी का नाम राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा है. मोनिका के अलावा तीन अन्य बच्चों के नाम भी पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम चयन के बाद गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा इन बच्चों को दिल्ली में पुरस्कृत किया जाएगा। परिषद के महासचिव बालकृष्ण डोभाल की ओर से हाल में प्रदेश के बहादुर बच्चों के नाम भारतीय बाल कल्याण परिषद को भेजे गए हैं. इनमें चमोली के कालेश्वर गांव की मोनिका (17) का नाम भी शामिल है. मोनिका 15 जून को गांव के पास अलकनंदा नदी में कपड़े धोने के लिए गई थी। दो छोटी बहनें और दस वर्षीय भाई साहिल भी उसके साथ थे। इस दौरान साहिल नदी में नहाने लगा और तेज बहाव में बहने लगा. साहिल की चीखें सुन मोनिका ने नदी में छलांग लगा दी. उफनाती धाराओं के बीच उसने साहिल को तो किनारे लगा दिया, लेकिन खुद को बचा नहीं सकी. मोनिका के पिता विकलांग हैं और उसके दादा की पेंशन से परिवार का गुजारा चलता है. मोनिका की दो छोटी बहनें हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है. उत्तराखंड राज्य बाल कल्याण परिषद मोनिका की दोनों बहनों को हरसंभव सहायता प्रदान करेगा. मोनिका का नाम मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जा रहा है. बाकी तीनों बच्चों की बहादुरी भी प्रदेश के बच्चों के लिए प्रेरणादायी है. हालांकि, पुरस्कार पर अंतिम चयन राष्ट्रीय बाल कल्याण परिषद को ही करना है.

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